यूँ तो ज़िन्दगी मे कई मोड आयेंग़े
कभी खुशी तो कभी गम लायेंगे
ख्याल रखना हमेशा खुद का
क्यो की आप हसेंगे तो हम भी मुस्कुरायेंगे
थक गया हूँ
थक गया हूँ तुझे याद करते करते
अब मै तुझको याद आना चाहता हूँ
थम गये है मेरी आंखो मे आंसु
अब मै तेरी आंखो से बहना चाहता हूँ
दिल का राज़
दिल मे छुपा है एक प्यारा सा राज़
दिल तो गाये हर पल बस एक साज़
दिल को है आप पर इस कद्र नाज़
कि दिल बस मांगे आपसे प्यार का आगाज़
Aapke naam ka phool
Akela hai dil
Jab se tumse mulakat hai huyi
Zindagi se shikwa
Vo roye to bahut
Mehabooba
Khushi ka sapna
kya sunaye
Ye durian
Thak gaya hu
मुझे बस खुदा
मांगू बस खुदा से वो इबादत दे दे
उसके खज़ाने से थोडी सी मोहब्बत दे दे
या तो वो मुझे उम्र भर का साथ दे दे
या उसके दर पे मरने की इज़्ज़ाज़त दे दे
खामोश रात
रात कितनी चुप सी खामोश है
इसके सीने मे कोई बात दबी तो होगी
ना इसने कही ना हमने सुनी
बात तो बात है जुबा पर ही होगी
प्यार से प्यारा, प्यार का इज़्हार है
इसके बिना प्यार, अधुरा है बेकार है
इज़्हार से ही तो, प्यार शुरु होता है
इज़्हार के बाद ही, इंसान सपने सजोता है
प्यार का इज़्हार, तेडी खीर है
पर इसके बिना, ना मजनु ना हीर है
जो इंसान इज़्हार नही करता, खामोश रहता है
उसे सारी उम्र भर, इसका अफसोस रहता है
उनका ज़ख्म अपना दर्द
अगर उन्हे लगे कोई ज़ख्म
तो दर्द हमे हो
अगर उन्हे हो कोई गम
तो पलके हमारी नम हो
अगर उनपे हो कोई सितम
तो सांसे हमारी कम हो
और उनपे खिली रहे हर पल मुस्कान
चाहे खुशी हमारी कम हो
फूल नही तो खुशबू की बातें
फूल नही है तो क्या हुआ खुशबू की बाते तो है
साथ नही है तो क्या हुआ वो मुलाकाते तो है
प्यार नही है पर वो चाहत की रातें तो है
और वो नही है तो क्या हुआ पलको मे उनकी यादे तो है
दर्द
एक ही ख्वाब को आंखो मे कई बार सजाया मैने
अपने ही अश्को से फिर उस ख्वाब को मिटाया मैने
राह के जिस मोड पर बदल गयी थी मन्ज़िल मेरी
आज फिर उसी राह पर कदम को उठाया मैने
जो था मसिहा मेरा, आज उसे पत्थर कह दिया
ना चाहते हुये भी जुल्म कमाया मैने
एक तरफ मौत है और एक तरफ बसर तन्हा
प्यार मे क्या कहुँ की क्या पाया मैने
धुआँ ही धुआँ उठता रहा मगर आग ना जल पायी
आज इस कद्र उसके खातो को जलाया मैने
मौसम ये सुहाना
दिल को भा गया है ये मौसम सुहाना
दिल तो होने लगा है अब और भी दीवाना
दिल ना चाहे की आप करो और कोई बहाना
क्योकि आपके बिन दिल का नही कोई और ठिकाना
चाहत को तेरी छुपा कर जीये जा रहा हूँ मै
चाहत को तेरी छुपा कर जीये जा रहा हूँ मै
खुद को हसी फरेब दिये जा रहा हूँ मै
तू बेवफा है फिर भी मेरा हौसला तो देख
तुझ पर वफा निसार किये जा रहा हूँ मै
खामोश हूँ की तू ना हो रुसवा जहाँ मै
खुद अपने लबो को सिये जा रहा हूँ मै
और बट तेरा तराश के पूजुगा इसलिये
पत्त्थर तेरी गली से लिये जा रहा हूँ मै
वो आये
वो आये मेरी कब्र पे
दिया बुझा कर चल दिये
जो बचा कुछ तेल था
सिर मे लगा के चल दिये
ये मुलाकात
चाँदनी रात और मेरे हाथो मे तुम्हारा हाथ
नूर ही नूर बिखरा है हरसू कितनी सुहानी है ये रात
सबसे जुदा होकर हम तेरी धडकनो मे समा गये
खुद को खो दिया हमने ना जाने कैसी हुई तुमसे मुलाकात
तेरे हाथो की लक़ीरो मे देखा है अपना नसीब
तेरे ही नाम से शुरू होकर तुझ पर आके खत्म हो मेरी हर एक बात
प्यार के सफर के हम दो राही चले है एक दुजे के साथ
दिल की दुनियाँ भी बसाई है हमने देके दिल की सौगात
फलक पर यूँ उमड आये बादल बन के प्यार
भीगे हम भी रात हुई कुछ ऐसी बरसात
तस्सव्वुर मे रहती है हर दम बन के हम ख्याल
अपने चाँद से अपने मेहबूब से मेरी ये मुलाकात
नशा है दिल मे
नशा है दिल मे और है एक खुमार
दिल तो बस है आपसे मिलने को बेकरार
ना जाने दिल कैसे करे आपसे ये इकरार
कि प्यार है इस दिल मे आपके लिये बेशुमार
ये फूल
दिल के हर लफ्ज़ो को ब्यान करते ये फूल
खुशियाँ और गम को समेटते ये फूल
हर हाल मे जीना सिखाते ये फूल
मौसम के हर रंग को सहना सिखाते ये फूल
गम-ए-दिल को हसना सिखाते ये फूल
नई उम्मीद और उमंग जगाते ये फूल
आंखो से उतर कर दिल को सुकुन पहुँचाते ये फूल
चंचल हवाओ के संग उड जाना सिखाते ये फूल
दिलो के दरमियान दुरियाँ मिटाते ये फूल
राह चलते राही का दिल लुभाते ये फूल
फिज़ाओ को महकाते और राहो मे बिछ जाते ये फूल
दिलरूबा के होठो पे मुस्कुराहट लाते ये फूल
दिल को अभी अभी नही हो रहा है ये आभास
दिल ना जाने आप हो कितने हमारे लिये खास
धीरे धीरे होगा आपकी कमी का हमे एहसास
कुँवारे हम भी नही
तुम हसीन हो तो हम भी कुछ कम नही
तुम महलो की हो तो हम भी सडको के नही
प्यार कर के कहती हो के शादी शुदा हूँ
कान खोल कर सुन लो कुँवारे हम भी नही
दर्द
एक ही ख्वाब को आंखो मे कई बार सजाया मैने
अपने ही अश्को से फिर उस ख्वाब को मिटाया मैने
राह के जिस मोड पर बदल गयी थी मन्ज़िल मेरी
आज फिर उसी राह पर कदम को उठाया मैने
जो था मसिहा मेरा, आज उसे पत्थर कह दिया
ना चाहते हुये भी जुल्म कमाया मैने
एक तरफ मौत है और एक तरफ बसर तन्हा
प्यार मे क्या कहुँ की क्या पाया मैने
धुआँ ही धुआँ उठता रहा मगर आग ना जल पायी
आज इस कद्र उसके खातो को जलाया मैने
मौसम ये सुहाना
दिल को भा गया है ये मौसम सुहाना
दिल तो होने लगा है अब और भी दीवाना
दिल ना चाहे की आप करो और कोई बहाना
क्योकि आपके बिन दिल का नही कोई और ठिकाना
चाहत को तेरी छुपा कर जीये जा रहा हूँ मै
चाहत को तेरी छुपा कर जीये जा रहा हूँ मै
खुद को हसी फरेब दिये जा रहा हूँ मै
तू बेवफा है फिर भी मेरा हौसला तो देख
तुझ पर वफा निसार किये जा रहा हूँ मै
खामोश हूँ की तू ना हो रुसवा जहाँ मै
खुद अपने लबो को सिये जा रहा हूँ मै
और बट तेरा तराश के पूजुगा इसलिये
पत्त्थर तेरी गली से लिये जा रहा हूँ मै
चोट
जब कोई याद सी लहराई है
दिल ने एक चोट नई खायी है
फूल दामन मे हो या कांटे हो
तेरी हर चीज़ मेरी रुबाई है
क्या अजब खेल दिखाता है हमे
वक़्त ऐसा भी तमशाई है
किसको दुनियाँ मे हम कहे अपना
यहाँ हर चीज़ ही पराई है
आप कांटो से हुये है घायल
चोट फूलो से मैने खायी है
भीड मे तन्हा-तन्हा रहता हूँ
ऐसी तबियत ही मैने पायी है
ज़िन्दगी नाम है मुक़द्दर का
मात किस्मत से मैने खायी है
ये मुलाकात
चाँदनी रात और मेरे हाथो मे तुम्हारा हाथ
नूर ही नूर बिखरा है हरसू कितनी सुहानी है ये रात
सबसे जुदा होकर हम तेरी धडकनो मे समा गये
खुद को खो दिया हमने ना जाने कैसी हुई तुमसे मुलाकात
तेरे हाथो की लक़ीरो मे देखा है अपना नसीब
तेरे ही नाम से शुरू होकर तुझ पर आके खत्म हो मेरी हर एक बात
प्यार के सफर के हम दो राही चले है एक दुजे के साथ
दिल की दुनियाँ भी बसाई है हमने देके दिल की सौगात
फलक पर यूँ उमड आये बादल बन के प्यार
भीगे हम भी रात हुई कुछ ऐसी बरसात
तस्सव्वुर मे रहती है हर दम बन के हम ख्याल
अपने चाँद से अपने मेहबूब से मेरी ये मुलाकात
नशा है दिल मे
नशा है दिल मे और है एक खुमार
दिल तो बस है आपसे मिलने को बेकरार
ना जाने दिल कैसे करे आपसे ये इकरार
कि प्यार है इस दिल मे आपके लिये बेशुमार
धडकन है यही दिल है तेरे पास
एहसास ऐसा हुआ है
आज पहेली बार
धडकने है यही
दिल है तेरे पास
ज़िन्दगी मे मेरी
आयी है जब से तू
बन गयी तू मेरी तमन्ना
तू बन गयी मेरी आरजू
अब तुम ही मुझे बताओ
क्या यही होता है प्यार
बात मेरे दिल की
पहले होठो पे आयी नही
तेरे बिन इस दिल मे
कोई मुरत समाई नही
आज सब के सामने
करना चाहता हूँ इज़्हार
दिलों पे राज करने को
न तो शैतान चाहिए, न ही भगवान चाहिए
दिलों पे राज करने को - फकत इन्सान चाहिए
दिलों से बात जो निकले, दिलों तक जा पहुँचती है
उसे सुनने के वास्ते - न कोई कान चाहिए
मोहब्बत की इमारत खूब सुन्दर बन सकेगी पर
निगाहों में जो जँचता हो, वही सामान चाहिए
कसम, वादे सभी झूठे, दिलासा दे नहीं पाते
भरोसा जीतने को बस - खरा ईमान चाहिए
ज़माने से जुदा एक दोस्ती, क्यों हो नहीं सकती
मगर दोनों के दिल में, 'एक से' अरमान चाहिए
मेरी दरख्वास्त उस की समझ में आ ही नहीं पाती
तुम्ही बोलो मुझे अब कौन सी जुबान चाहिए
07
Sep
Author: Arun Sharma // Category:
Friendship Shayari,
Love Shayari
On Shayari4All.com By Bharat Dureja
Apni har ghazal me
tera hi zikr kiya karte hai
is baat ka kisi aur ko ilm na ho
yeh fikar kiya karte hai
hothon per baat hai ruki
jaane kyun kehne se darte hai
Aaj saari hadein todkar
kehte hai ke hum tumpe marte hai
07
Sep
Author: Arun Sharma // Category:
Friendship Shayari,
Love Shayari
On Shayari4All.com By Sarfaraz amani
Tamanna leke ulfat ki, mere aangan mein wo aya
mohabbat rog hai dil ka, use ye maine samjhaya
Kaha usne mohabbat kar, shareeke gham bana mujhko
karronga main zamaane ki, khushi se aashna tujhko
Hua majboor main yaaron, kia iqraar ulfat ka
laga di jaan ki baazi, samajh kar khel qismat ka
Hui maloom phir usko, haqeeqat ye zamaane se
use taskeen milti hai, kisika dil dukhaane se
07
Sep
Author: Arun Sharma // Category:
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Apni har ghazal me
tera hi zikr kiya karte hai
is baat ka kisi aur ko ilm na ho
yeh fikar kiya karte hai
hothon per baat hai ruki
jaane kyun kehne se darte hai
Aaj saari hadein todkar
kehte hai ke hum tumpe marte hai
07
Sep
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Tamanna leke ulfat ki, mere aangan mein wo aya
mohabbat rog hai dil ka, use ye maine samjhaya
Kaha usne mohabbat kar, shareeke gham bana mujhko
karronga main zamaane ki, khushi se aashna tujhko
Hua majboor main yaaron, kia iqraar ulfat ka
laga di jaan ki baazi, samajh kar khel qismat ka
Hui maloom phir usko, haqeeqat ye zamaane se
use taskeen milti hai, kisika dil dukhaane se
07
Sep
Author: Arun Sharma // Category:
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On Shayari4All.com By Sameer
Likh diya apne dar pe kisi ne
is jagah pyar karna mana hai
Pyar ho bhi jaye agar to
uska izhar karna mana hai
E-Dost khula hai jo jarokha
Kha na jana tum uska dokha
Us jagah ab shouk-e-didar karna mana hai
Humne arz ki ye banda parwar
kyoun sitam dha rahe ho tum hum par
Usne kaha hum se takrar karna mana hai
07
Sep
Author: Arun Sharma // Category:
Friendship Shayari,
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On Shayari4All.com By Durgathakur
Raat guzri phir mehkti hawa aayi
Dil dhadka phir tumhari yaad aayi
Aankho ne mehsoos kiya us hawa ko jo
Tumhe chhukar hamare paas aayi