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जुदाई का गम
By : Sahejad Quadri
जुदाई का मुझे गम भी है कोई ऐसी खता ना करे
पर दुख क्या करे तेरे बिन कैसे जीये
आंखो मे प्यार लिये बोलो कहाँ कहाँ फिरे
सजनी पास बुलाओ ना के दिल आज टूटा है
सजनी मान जाओ ना के वो आज रूठा है
हमे दिल से भुलाओ ना अब येही कहना है
आपकी हमसे पहचान नही होती
By : Sahejad Quadri
खुदा से कोई बात अंजान नही होती
हर किसी की नियत बेमान नही होती
कभी मांग़ा होगा आपने एक प्यारा दोस्त
यूँ ही आपकी हमसे पहचान नही होती
आसमा के तारे
By : Sayarpan
आसमा के तारे अक्सर पूछते है हमसे
क्या तुम्हे आज भी इन्तेज़ार है उसके लौट आने का
मेरा दिल मुस्कुरा के कहते है
मुझे तो अब तक यकीन ना हुआ उसके चले जाने का
ये दुनियाँ ही जन्नत है
By : Sahejad Quadri
ये दुनियाँ ही जन्नत थी
ये दुनियाँ ही जन्नत है
सब कुछ खोकर आज ये
हम पे क्या हुआ है
जाने ये कैसी आग लगी है
जिसमे धुआँ ना चिंगारी है
सजनी पास बुलाओ ना
By : Sahejad Quadri
मै तेरी आंखो मे रहता हूँ तुझे पता ना चले
तेरे हर पल मे गुज़रा हूँ तुझसे पता ना चले
पर दुख क्या करे तेरे बिन कैसे जीये
आंखो मे प्यार लिये बोलो कहाँ कहाँ फिरे
खफा तो हम भी है तुम भी हो हमे पता ना चले
हिचकियाँ क्यो आने लगी है
By : MUSKAAN RIDA
ये हिचकियाँ क्यो आने लगी है
फिज़ाओ मे खुशबू सी छाने लगी है
ये सोच कर दिल है बहुत खुश
कि शायद किसी को मेरी याद आने लगी है
दिवानो को दिन क्या है रात क्या
By : Sahejad Quadri
खुद का नही है भरोसा कोई दुनियाँ का साथ क्या
रोने से कही अच्छा है तू गले झूम के
फूलो का जला दे सिना कांटो को चूम के
हम दिवाने है दिवानो को दिन क्या है रात क्या
भूल जा कस्मे तोड दे वादे
By : Sahejad Quadri
भूल जा कस्मे तोड दे वादे
ना बदले किसी ने यहाँ इरादे
हुस्न भी झूठा प्यार भी झूठा
वफा भी झूठी यार भी झूठा
रही ये दुनियाँ उसकी होकर
मार दे दुनियाँ जिसको ठोकर
शीशे की उम्र प्यार की आखिरी बिस्त क्या
By : Sahejad Quadri
शीशे की उम्र प्यार की आखिरी बिस्त क्या
टुटा जो दिल किसका तो गैरत की बात क्या
हम अपने लिये जीते है हमे जहाँ से क्या
हम खुन-ए-जिगर पीते है हमे जहाँ से क्या
ईद के रोज़
By : Ashique-E-Bimar
इतने मजबूर थे ईद के रोज़ तक़दीर से हम
रो पडे मिलके गले आपकी तस्वीर से हम
राहो की ये शाम और यादो का ये समा
अपनी पलको मे हरगीज़ सितारे ना लायेंगे
रखना जरूर सम्भाल के तुम कुछ खुशियाँ मेरे लिये
मै लौट के आंऊगा फिर ईद मनायेंगे
देख कर ईद का चाँद ये दुआ मांग़ रहे है
ए खुदा उन आंखो मे ये चाँद हमेशा चमके
पिछली ईद मे जितना याद किया था उन्हे
या खुदा इस साल ईद सिर्फ याद मे ना गुज़रे



